मैं हुं क़ुतबुद्दीन का दीवाना I love Qutbuddin

Poetry Hindi

मैं  हुं क़ुतबुद्दीन का दीवाना ,  बन गया  अब खुब  मस्तानाहोगा जहाँ से मेरा रवाना, कहेंगे गया क़ुतबुद्दीन का दीवानासुनती नहीं यह  दुनिया , मुजे  उसे अब  न कुछ  कहनाजब होगा हमारा यहाँ से जाना , सुनाओ अब हमे सुननाक़ुतबुद्दीन के मज़ार  पर जाना, चारों और मसत  गुमना फिरनामैं बना उनका  परवाना, शायद   मीलेगा जननत का परवाना

कुतबुददीन ने दुनिया ने  देखा, मगर कोइ न समजा न पहचाना

न मुलक, न शाही, सीरफ अपने हाथो से नव रतन को  बनाना

कबर मे बादशाह अकबर परेशान, मेरे पास दुनिया का खजाना

मेरा  काम  दुआ मांगना, यह वली का काम सब को दुआ देना

सब कहे मुजे मुगले आजम, मगर मुजे यह मवला पे फिदा होना

मुजे कहने दो : मन कुनतो मवला हो हाजा अलीयुन मवला

जब आया कसोटी का जमाना, मवला को अब वाअदे को  नीभाना

दुनिया बनी ना शुकराना, बेबस मोमीन का बस मवला से लीपटाना

मवला ने नस एलान की , उठ! जवाब दे,  ए ! सोया हुआ जमाना

डर के, चुहे जैसे, घूसे दर में सब, मोमीन को मवला को जवाब देना

चालीस  दीन हुए, इमानी जोश  मवला के  चेहरे पर  नजर  आना

अजब जोश, ६०० जवाबों का खुतबा, कचेरी में मवला जवाब देना

दावत को आप नै बनाइ पुखता , अब न किस दुशमन नारी से डरना

बुनयाद  अब  हीलैगी नहिं , चाहै  आए  तुफान , देखेगा  जमाना

अब मवला को आया उपर से बुलावा, ताहेर का जानशीन होना

सीलसीला चालु है,  फखरुददीन के रोब से आदी का गभराना

दुशमन का नहीं है  चारा,  जुलफिकार का  बेमयान  होना

भटके हुए चारो जानिब  से, न वकते फरार, अब कहां जाना ?

रब तेरी मदद ,  तुने  बाजी पलटी,  मवला को  शुकर करना

दुआ हुनैद की, नसरे अजीज, फतेह मुबीन ताहेर को बखशना

Mugal Emperor Akbar’s action in grave and outside and his thoughts and devotion to Syedna Dawood AQ is purely poetic imagination. However, the fact is that besides being liberal , just and secular he was extremely brave ( instead of ordering he will venture out alone , jump in Sabarmati river etc  and army followed him due to his action .  He was sort of सीकंदर ए हींद  , India’s Alexander )  and deeply religious and with the company of his sufi friends he was spending long nights  and singing song of  Amir Khusrow  like मन कुनतो मवला हो... ( though Sunni Hanafi ). Again he had shown  lot of devotion and respect to Syedna Dawood AQ. So imagination of him giving respect to Maulana Qutbuddin AQ is not totally our of place.