मदेह सैयदना ताहेर फखरुददीन

Posted on Tue, Nov 21, 2023 Duat Mutlaqeen poem

मदेह सैयदना ताहेर फखरुददीन तउश

ताहेर फखरुददीन , वही मरकज़, वही इमान दुनिया जो चाहे समजे मेरी बस यहीं है पहचान

खुदा ! बख्श दे वह हद तक फतेह मुबीन जाना न पड़े ताहेर को अदालत सुप्रीम मेरे कुतबुददीन का है ताहेर जानशीन फ़रार हो हींदुसतान से दुश्मन बदतरीन

या दुश्मन घुमता फिरे दुनिया में इधर-उधर लापता ला पहचान या बंदीवान हो कैद मे तवील जमान रोशन हो दुनिया को कहाँ है इमान

दुसरी दुआ है , ताहेर के हाथ पर कर इमाम जुहुर दुनिया में ला तु अदल , जहाँ में सब नूर नूर इमाम सअ खड़े है , ताहेर है सजदे में उठा ले ताहेर को बसाये अपने पलकों मे

हमारी आँखों में हो ख़ुशी के आँसु यह सब मंजर देखेंगे सब चारों बाजु अल्लाह पलट दे हमारा नसीब पुरा जहान कर दे इमान से क़रीब

तीसरी दुआ: कर ताहेर की उमर तवील ताहेर इल्म में दुबा सरापा वह है इमान की दलील ताहेर हमारा रहबर सरदारे मंज़िल तेरे इमाम का रसुल हमारा भला वकील

हुनैद फखरुददीन खोराकीवाला २७ ओकटोबर , २०२३