मदेह सैयदना अबु खुजैमा फखरुदददीन त उ श [Madeh Syedna Fakhrudddin]

Duat Mutlaqeen Poetry

ए  सैयदना अबु खुजैमा ताहेर फखरुददीन ,ए वारीसे सरापा कुतबुददीन ए अदाए वाएज  मे बुरहानुददीन,तो जजब ए बयान में गोया सैफुददीन

आप होते तखत पे  जलवानुमा,  सामने आते कुतबुददीन खुजेमा सहरे हलाल है आप के बयानात,गौर से सुनती मुमीन की जमात

कुरआन  खुदा से गर नहीं नाजील, तो लाओ िकताब एसी फाजील एसी एक सुरत भी लीख निहं सकते,सब मील के भी कर निह सकते

अगर शक है फखरुददीन दाइ हक के , तो  सुनाओ वाइज इन की िमसल कर के हासीद के पास न इलम है न अदा है ,है तो सीरफ छीनी हुइ कुरशी और जूथ है

हकक की  ताकतके  लीए जैसे  कुतबुददीन  मवला  हाजीर , आप    हाजीर उलटे सीधे  सवाल करते  कािफर , सुकुन है आप को ,सब इलम मे है माहीर

सूरते मरयम  की  ५३ की आयत , मूसा हारुन  दोनो   एक समान दोनो का एक ही मकाम , वैसे ही  है दाइ मनसुस दोनो  एक समान

कायम कर  लीआ जो नस से,वसी ने पा लीया नबी के दरजे को यह है रब की सुननत, आदी कया मीटाएगा हकक की आवाज को

आती मवला कुतबुददीन की हरदम याद,  दुनीया ने  न  दी आप को दाद कभी   आप   ने  न  की  फरयाद ,दील में गम,मगर चेहरा शाद शाद

नव रतन    बना   कर   सीधारे  , मीसाल  कायम  कर  के  सीधारे अदालत मे ६०० जवाब  दे कर सीधारे, ताहेर को रख कर सीधारे

जो  दुआ आका कुतबुददीन के वासते , अब  वह दुआ आका फखरुददीन  के वासते आप को खुदा नसरे  अजीज बखशे,जरीह ए फातेमा,नबी स अ बनाने का मौका बखशे